कभी भी ना करें विषकन्या से विवाह

कभी भी ना करें विषकन्या से विवाह

 हम यहाँ पर सिर्फ़ ज्योतिष् मे उल्लिखित विष्कन्याओं से संबंधित बात करेंगे !हिंदू और पश्चिम के मिथकों तथा मौर्य वंश के समय विष्कन्याओं का इस्तेमाल विरोधियों के लिए करने का उल्लेख है !   ज्योतिष् मे विषकन्या का अर्थ है की वे गुस्सैल तथा बुरे वार्ताव वाली होंगी और उनके पति उन्हें पसंद नहीं करेंगे ! और इनके पति की मृत्यु कम आयु में अवश्य होगी और ये बार बार विवाह करेंगी !   ज्योतिषीय योग (इसे पुरुषों पर भी लागू कर सकते हैं )   – एक औरत जो भद्रा तिथि में रविवार मंगलवार या शनिवार को कृतिका, असलेषा या षटशिभा पैदा हुई हो “विषकन्या” होती हैं ! ऐसी स्थिति मे पति की मृत्यु हो जाती है और महिला बार बार काई बार विवाह करती है !   -द्वादशी के रविवार तथा षटशीभा नक्षत्र या सप्तमी के मंगलवार को विशाखा नक्षत्र में तथा द्वितीया को रविवार पड़े तथा आशलेषा लक्षत्र मे पैदा हुई महिला “विषकन्या” होगी ! यह महिला भी पति की मृत्यु के बाद काई बार विवाह करेगी !   – जस्ब सूर्य और शनि लग्न मे हो और चंद्रमा पाँचवें या नवें घर मे हो तब भी विषकन्या योग बनता है !  Published inLove Astrology Predictions And Articles



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